क्रमाॅंक:- 320, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- मुसाफिर राहों का
मुसाफिर चलो राह में सफल करो काज।
सदा बचना काँटों से जिंदगी फिर साज।।
जिंदगी के इस राह में सुंदर रखना भाव।
जिंदगी के दुर्गम सफर में हंस कर गले लगाव।।
कठिन राह से घबराना नहीं जानो मंजिल अर्थ।
हंसकर या रो कर जिंदगी सफर है पार्थ।।
कठिन राह से कभी घबराना नहीं इंसान।
मिल जाये मंजिल तो बढ़ जायेगा मान।।
कठिन राह से जो घबराये मिलता नहीं मंजिल।
जीता मुश्किल राह से साथ देता एंजिल।।
चलो मुसाफिर मुस्कुरा के मिलता कर्म ज्ञान।
कठिन राह से जो ना डरे मिलता शुभ सम्मान।।
काँटें मिले हर मंजिल में तो बदल दो अपनी राह।
नेक कर्म से पूरी करो मंजिल की चाह।।
भटकाने वाले कई इंसान हैं रखो शांत स्वभाव।
सदा मानव मंजिल से रखना तुम लगाव।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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