क्रमाॅंक:- 333, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- समस्या आने पर अपना भी पराया है
जब भी हो समस्या तो अपना भी पराया है,
इस मतलबी दुनिया में इंसान खुद अपनों से हारा है।
पैसों की गर्मी दिखाकर खुद को अमीर समझा है।
रिश्तों को जो करें अनदेखा हमें नहीं गवारा है।।
रिश्तों के हम भूखे हैं, पैसों के नहीं,
अपनों को समस्या में देख, खुद को नकारा है।
रब चला रहा है जीवन, हम तो बस इंसान है
अपनों ने हमें किनारा कर, निज जीवन मस्ती में गुजारा है।।
रिश्तों का मोल समझो मानव, रिश्ते हमें बचाना है।
पैसों की घमंड में अपनों ने खुद को सितारा समझा है।
धैर्य की परीक्षा लेकर अपने, समझे हमें कायर।
छोटी सोच रख हमें अपनों ने बेकार समझा है।
रिश्तों का मोल समझकर, खुद को संवारा है।
मुझको देगा समझा, आज वह खुदगर्ज निकला।
पैसों की गर्मी दिखाकर, खुद को अमीर समझा है।
सच्चे रिश्तों के बीच में वो घमंडी निकला।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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