क्रमाॅंक:- 358, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष मुक्तक रचना- माँ शारदे
माँ शारदे के सुन वीणा धुन खुशियाँ छा गई।
मन था ब्याकुल मेरा माँ से खुशियाँ आ गई।
प्रिय के सुन रचनाएँ नाच उठी पंखुड़ियाँ।
माँ शारदे की ममता सदा मुझको मिल गई।।
माँ शारदे सदा ही मुझको प्यार देना।
बसंत ॠतु दिवस को ज्ञान मुझे दे जाना।
हिन्दू धर्म परंपरा को तुम कभी ना भूलना।
मिले प्यार दुलार को तुम कभी ना खोना।।
जपता रहूँ दिन-रात मैं माँ शारदे का नाम।
करके वंदना माँ शारदे का करूँ लेख काम।
आते मुशीबत जीवन में आये माँ शारदे मेरा।
गढ़ सृजन आगे बढ़ू माँ शारदे सुबह-शाम।।
माँ शारदे से सारे तिमिर मिट गया।
ज्ञान पुंज के दीप से छाये बादल हट गया।
प्रिय संग सारे सखा को ज्ञान पुंज मिल गया।
प्रिय मन में माँ शारदे का बसेरा हो गया।।
इस संसार में ज्ञान का बढ़ा मोल है।
अपने - अपने ज्ञान सबको अनमोल है।
मन के अज्ञानता को माँ शारदे दूर करो।
माँ शारदे के नाम से सफल होता काम है।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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