क्रमाॅंक:- 408, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- नदियों के देश में जलसंकट
भूजल गिरता जा रहा; मिले कहाँ अब नीर।
मानव जंगल काट के; तन को देता पीर।।1।।
मानव ब्यर्थ बहा रहे; पावन निर्मल नीर।
जल का संकट आ गया; मानव करता पीर।।2।।
जंगल के हरियाल को; मानव नहीं उजाड़।
सूख रहा जल धूप में; फटे सारे पहाड़।।3।।
नीर बचाने के लिए; मानव रहो सचेत।
नीर बर्बाद रोक के; मानव दो संकेत।।4।।
बरखा के बौछार से; खिल जाता है फूल।
मिले नहीं जब नीर तो; रहे नही अनुकूल।।5।।
एक बूँद तो नीर का; जीवन में है मोल।
मजबूती से रोक लो; नीर बढ़ा अनमोल।।6।।
नीर बर्बाद जो करें; आता नहि है बाज।
मन में रखना धैर्य तो; सुखमय होता काज।।7।।
आओ मिलकर रोक लें; बरखा के जलधार।
मिलके करना काम तो; रुक जायेगा नीर।।8।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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