क्रमाॅंक:- 440, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- दीपक की लौ शांत
रात के अंधकार में; जलता दीपक शांत।
बात नहीं अज्ञान का; भूल नहीं सिद्धांत।।1।।
जलता दीपक द्वार में; रोशन करे प्रकाश।
दीपशिखा के आग से; दिखता है आकाश।।2।।
दीपक धीमी चाल से; रोशन है संसार।
दीपशिखा के तेज से; मिटता भ्रष्टाचार।।3।।
दीपक घर रोशन करें; स्वयं जलाकर देह।
घोर सा अंधकार में; मिला नहीं है नेह।।4।।
दीपक जलता शाम को; हर मंदिर घर द्वार।
प्यारा सा आकार से; मिलता सबको प्यार।।5।।
जलते दीपक शान से; सुंदर उनका रूप।
जलके सुंदर रूप में; बिखरे छठा अनूप।।6।।
दीप जले दीपावली; सभी घरों के द्वार।
रोशन कर संसार को; देता सबको प्यार।।7।।
रघुनंदन श्रीराम का; अवधपुरी है धाम।
मनन करो श्रीराम का; बनते सारे काम।।8।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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