क्रमाॅंक:- 450, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- जगन्नाथ रथयात्रा
सुंदर रथ यात्रा सजा; देखो रथ त्योहार।
शुक्ल पक्ष आषाढ़ में; सजा हुआ बाजार।।1।।
थामों मेरे हाथ को; भगवान जगन्नाथ।
खो न जाऊँ भीड़ में ; ले चल अपने साथ।।2।।
सुंदर पावन धाम में; रहो प्रभु जगन्नाथ।
भाई बहना साथ में; रथ में आते नाथ।।3।।
भाई बलभद्र रहे ; बहना सुभद्रा संग।
सुंदर उनके रूप हैं; भरते जीवन रंग।।4।।
सुंदर से आकार में; खड़े हुए रथ तीन।
चकित रहे जग देखकर; रथयात्रा के सीन।।5।।
सोलह चक्कों से बने; रथ बैठे श्रीनाथ।
अपने भक्तों को सदा; प्रभुवर करे सनाथ।।6।।
पीछे रथ चलता हुआ; चौदह चक्के साथ।
जिस पर हैं बलभद्र जी;भक्त लगाये हाथ।।7।।
भाईयों के साथ में; बहना चलती जाय।
बारह चक्के से सजा,सुंदर रथ अति भाय।।8।।
आते देश-विदेश से; लोग पुरी के धाम।
देखते जगन्नाथ को; अद्भुत ढलती शाम।।9।।
प्रिय निषाद तू साथ में; लेकर चल परिवार।
भीड़ लगा है पुरी में ; प्रभुवर देना प्यार।।10।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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