क्रमाॅंक:- 456, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- प्रिय पूनम की प्रेम कहानी
प्रिय प्रेम के सागर हो; पूनम तेरी दीवानी है।
मन की बातें सुनकर; दिल की लिखी कहानी है।।
जब से मिला तेरा प्यार; जीवन में जगी आस है।
बनेगी हमसफर जीवन का; दिल में यही विश्वास है।।
सुंदर तेरा चेहरा देख; मन में जगता प्यार।
प्रिय प्रेम के सागर से; पूनम को किया इजहार।।
प्रेम के सागर में डूब गया; पूनम दिखी है सामने।
प्रेम का संगम हो रहा; प्रिय आये हाथ थामने।।
प्रेम जगे झंकार से; जीवन का हो उद्धार।
प्रिय प्रेम के सागर से; पूनम को किया इजहार।।
अनजान हूँ इस प्यार से; लेकिन मन मचलने लगा।
सपने सजनी देख के; मन तड़पने लगा।।
सुंदर नयन को देखकर; प्रिय पूनम में खो गई।
इस प्रेम के सागर में; पूनम प्रिय की हो गई।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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