क्रमाॅंक:- 486, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- ओढू तेरा लिबास
साड़ी के लिबास में नारी सुंदर दिखती है।
साड़ी का महत्व नारी सदा लिखती हैं।।
गोरे तन पर लाल साड़ी पहनी हो,
तुम प्रिय के सुंदर-सी दीवानी हो।।
जब से तुम्हें देखा हूँ साड़ी के लिबास में।
तुम दिखाई देती हो काँच के गिलास में।।
सारा जिस्म ढका है साड़ी के लिबास में।
प्यार पूरा नहीं होता अधूरा विश्वास में।।
साड़ी के लिबास पहने तुझे देखता रहूँ।
तुम मेरे प्यार,ईमान हो यहीं मैं कहता रहूँ।।
साड़ी के लिबास का कीमत देखा नहीं जाता।
उपहार देने वालों का औकात देखा नहीं जाता।।
बहुत खूबसूरत लगती हो साड़ी के लिबास में।
ढूंढता रहा प्रिय दिल का निशान लिबास में।।
विदेशी महिला को साड़ी पसंद आने लगी।
साड़ी के लिबास से अब जिस्म बचने लगी।।
माॅडल कपड़ों में साड़ी जैसा एहसास कहाँ।
महिला साड़ी के लिबास में दिखेगा सारा जहाँ।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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