क्रमाॅंक:- 557, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- कवि की कविता
एक-एक शब्दों को जोड़ मैं कहानी सिखता हूँ।।
प्रिय के आवाज में सदा कविता पढ़ता हूँ।
सुंदर साहित्य शब्दों से मैं कविता गढ़ता हूँ।।
मन में बहे रसधार को शब्दों से सजाता हूँ।
मन के सारे भाव को संगीत में बजाता हूँ।।
साहित्य,साहित्य नहीं समाज का दर्पण है।
रचनाकारों का जीवन समाज को अर्पण है।।
सुरों के राग से मन मचलने लगा है।
कलम की धार से कविता सजने लगा है।।
बिना साहित्य के मन मेरा बेचैन है।
हरपल साहित्य से आँखों में रैन है।।
मन के छिपे भाव से मैं कविता लिखता हूँ।
मिले साहित्य शब्दों से मैं कविता सिखता हूँ।।
ब्रज की गोपियाँ बहें कृष्ण प्रेम की धार।
कृष्ण प्रेम से राधा रानी का मन हुआ पार।।
हरपल कहता 'प्रिय' साहित्य का मान करो।
साहित्य से आदित्य हुआ सदा सम्मान करो।।
✍🏻 परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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