क्रमाॅंक:- 558, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- जल ही जीवन है
जीवन पानी से बचें,जल रक्षण कल्याण।।1।।
पानी-पानी चीखकर, लोग मचाए शोर।
धरा सूखती धूप से, जल संकट सब ओर।।2।।
सूरज तपता धूप से; निकल रही है आग।
जो भी आते ताप में; बन जाते हैं काग।।3।।
पानी से बेहाल है; मानव जीवन आज।
पौधों को काटो नहीं; करो समझकर काज।।4।।
पंछी तड़पे नीर बिन; हैं कितने बेहाल।
तड़प रहे हैं प्यास में; संकट है विकराल।।5।।
वृक्षों को काटो नहीं; देते हैं यह छाँव।
वन उपवन को काट कर; खुद न जलाओ पाँव।।6।।
प्रिय निषाद विनती करे, बनो मानव खुद्दार।
जल जीवन आधार से, है जीवन का सार।।7।।
✍🏻 परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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