क्रमाॅंक:- 579, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंदमुक्त रचना- भक्ति और आडंबर
भक्ति और आडंबर
पर्व शक्ति का अब बना, केवल ही हुड़दंग।
भक्ति-वीणा टूटती, शोर हुआ है संग।।1।।
रही न पावन रास अब, गरबा वाली चाल।
चढ़ा मुखौटा रूप पर, फैशन फैला जाल।।2।।
श्रद्धा-नदियाँ सूखतीं, चंचल लहरें मौन।
तज संयम बाज़ार में, गाता गाने कौन।।3।।
झुकी जहाँ पर भक्ति थी, शिष्ट भाव का वास।
आडंबर की डगर पर, मुरझाया विश्वास।।4।।
जन-जन फिर सजग बने, जागे शील-स्वभाव।
सौम्य तेज से जग जले, मिटे तिमिर-प्रभाव।।5।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
0 Response to "क्रमाॅंक:- 579, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंदमुक्त रचना- भक्ति और आडंबर "
एक टिप्पणी भेजें