क्रमाॅंक:- 580, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंदमुक्त रचना- कर्म और परात्पर प्रेम

क्रमाॅंक:- 580, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंदमुक्त रचना- कर्म और परात्पर प्रेम

                 कर्म और परात्पर प्रेम

अंकुर न फूटा क्षेत्र में, माटी दोष न होय।
स्वयं कर्म की संहिता, जो बोया सो होय।।

विधिकाल धरता हाथ को, तजे न क्षण भर साथ।
प्रारब्ध की जो लीक नहीं, चले न वह अब साथ।।

पूर्ण करे कौन जीव को, क्षणिक मोह का जाल।
चेतना जाने भाव सब, यथा देह और काल।।

मौन नियति का पाठ जो, वही सुजान प्रवीन।
प्रेम वही जो शून्य में, हेतु-रहित लवलीन।।

प्रेम न केवल ज्योति पुंज, अलख अगोचर चिह्न।
आत्म-पथ की धुंध में, अनाहत नाद से भिन्न।।

छाया थकी विलीन हो, पथिक पाए विश्राम।
निःशब्दों की गूँज में, परम-निर्वाण धाम।।

अंतः-स्पंदन ब्रह्म वह, अनिवर्चनीय अनूप।
हृदय-ऋचा जब गूँजती, प्रेम सत्य का रूप।।

                    परमानंद निषाद 'प्रिय

0 Response to "क्रमाॅंक:- 580, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंदमुक्त रचना- कर्म और परात्पर प्रेम"

एक टिप्पणी भेजें

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article