क्रमाॅंक:- 583, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंदमुक्त रचना- स्वयं से मिलन
स्वयं से मिलन
रंग उछलते हैं नहीं, उतरें स्वयं अपार।
गूँज तुम्हारी श्वास में, ठहरी बन ओंकार।।
समय-आवरण जब ढले, अंबर एक समान।
मिलन-विरह का अंत हो, एकात्मिक उत्थान।।
देही का यह रंग नहिं, चेतना-त्वचा का रूप।
मौन ऋचा सी लिख रही, विमल ज्योति अनूप।।
जन्म-जन्म की धूल भी, कर न सके निष्प्राण।
स्वयं स्वयं में मिल गया, हुआ स्वयं विस्तार।।
बाहर उत्सव क्या करें, भीतर मिटा विषाद।
शून्य आलोकित हो उठा, पाकर परम प्रसाद।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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