क्रमाॅंक:- 592, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- छत्तीसगढ़ का हरा सोना: तेंदूपत्ता
छत्तीसगढ़ का हरा सोना: तेंदूपत्ता
वनांचल की गोद में, बिखरा अनुपम रूप।
छत्तीसगढ़ का भाग्य यह, खिला सुनहरी धूप।।1।।
कोमल पत्ते श्याम के, वन-वन रहे लहाय।
हरा-सोना पाँव में, खुशियाँ लेकर आय।।2।।
मिट्टी की सौगंध ले, बढ़ते नन्हे प्राण।
तेंदू के ये पत्र ही, जीवन के वरदान।।3।।
कुदरत का श्रृंगार है, अंचल का आधार।
पत्ते-पत्ते में बसा, सुखी जगत सार।।4।।
सहकर जेठ की तपन को, मज़दूरों के हाथ।
बिनती करते देव से, सदा रहे यह साथ।।5।।
सौभाग्य का रंग है, उर में भरे उमंग।
पत्ते चुनती टोलियाँ, गातीं मीठी तरंग।।6।।
पुरखों की यह धरोहर, करिए नेक विचार।
वृक्ष रहेंगे साथ तो, महकेगा संसार।।7।।
छाँव घनी ये बाँटते, वन के रक्षक मीत।
पंछी कल-कल गूँजते, गाते मंगल गीत।।8।।
त्याग न अपनी जड़ों को, कीजे सदा सम्मान।
इन वृक्षों के दम से ही, सुरक्षित है इंसान।।9।।
हरा-भरा छत्तीसगढ़, गढ़े नवा इतिहास।
घर-घर में उल्लास हो, टूटे न विश्वास।।10।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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