क्रमाॅंक:- 593, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- पिता-पुत्री स्नेह
पिता-पुत्री स्नेह
पिता शक्ति का पुंज है, पुत्री शीतल छाँव।
रिश्ता ये अनमोल है, जैसे पावन गाँव।।
उंगली थामे बाप की, बिटिया बढ़ती जाए।
जग की सारी खुशियाँ, पिता चरणों में पाए।।
पिता हृदय विशाल है, बिटिया उसका मान।
एक दूजे की ओट में, बसती दोनों की जान।।
साया बनकर जो रहे, हरदम बिटिया संग।
पिता वही जो भर सके, जीवन में सब रंग।।
घर की रौनक लाड़ली, पिता सुदृढ़ आधार।
इनके प्रेम की धार से, महके ये संसार।।
पिता सिखाता है लड़ना, जग की मुश्किल राह।
बिटिया की मुस्काहट ही, पिता की असली चाह।।
सर पर हाथ पिता का, जैसे ईश का हाथ।
अंधियारे सब छँट गए, पाकर उनका साथ।।
ममतामयी जो बिटिया, पिता धैर्य का रूप।
एक चांदनी रात है, दूजा खिलती धूप।।
पिता संजोता सपने सब, बिटिया करती पूरा।
बिन बेटी के बाप का, जीवन लगे अधूरा।।
सात जन्म का साथ हो, ऐसा ये अनुराग।
पिता-पुत्री के प्रेम सा, नहीं और कोई भाग।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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