क्रमाॅंक:- 599, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- संवेदना: स्त्री की आध्यात्मिक शक्ति
संवेदना: स्त्री की आध्यात्मिक शक्ति
कोमल हृदय न जानिये, यह तो शक्ति अपार।
भीतर बहता प्रेम का, करुणा-सिंधु उदार।।1।।
अश्रु धार दुर्बल नहीं, गंगा की है धार।
भावों में ही बस रहे, शिव और शक्ति सार।।2।।
जग जिसे कमजोरी कहे, वह है आत्मिक बोध।
संवेदन में ही छिपा, शांत सकल अवरोध।।3।।
मृदुल भाव की ओट में, वज्र सा साहस पास।
जैसे शीतल चाँदनी, सूरज का परकास।।4।।
सहज भाव से जो सहे, वह माया का रूप।
धैर्य धरे जो प्राण में, वही चेतना अनूप।।5।।
बाहर कोमल बेल सी, भीतर अडिग हिमालय।
की देह में, दिव्य शक्ति का आलय।।6।।
रिश्तों को जो सींचती, बन कर प्रेम-पीयूष।
कण-कण में विस्तारती, चैतन्य का आनुष।।7।।
घोंट रही जो भाव को, वह जग का है दोष।
खोल रही जो द्वार है, वह आत्मिक संतोष।।8।।
संवेदन ही साधना, संवेदन ही योग।
बिना भाव के शून्य है, यह जग और उपभोग।।9।।
सत्य यही हे जगत जन, तजो बुद्धि का मोह।
हृदय की वेदना, ईश्वर का सम्मोह।।10।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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