क्रमाॅंक:- 629,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- गौरवमयी चारु
गौरवमयी चारु
चारु नाम की लाडली, रचती नया विधान।
तेईस की ही उम्र में, पाया उच्च मुकाम।।
कठिन परीक्षाएं सभी, जीतीं कर पुरुषार्थ।
मेहनत से उसने यहाँ, सिद्ध किया परमार्थ।।
सीजीएल और बैंक में, पाई है पहचान।
सीएजी पद शोभित हुआ, बढ़ा देश का मान।।
छत्तीसगढ़ की भूमि का, चमका गौरव आज।
बेटी की इस जीत पर, गर्व करे यह समाज।।
सोच रहे जो उम्र में, करना क्या है काम।
रचा उन्होंने चेतना, पाकर जग में नाम।।
द्रौपदी मुर्मू करेंगी, पदक सौंप सम्मान।
स्वतंत्रता के पर्व पर, बढ़ेगा स्वाभिमान।।
स्वर्ण पदक की चमक से, चमकेगा यह भाल।
मेहनत रंग लाती सदा, बनी मिसाल बेमिसाल।।
उन्नीस कठिन परीक्षाएं, पास करीं दिन-रात।
परिश्रम के बल पर मिली, यह अनुपम सौगात।।
मन में था संकल्प दृढ़, लक्ष्य रहा बस एक।
मंजिल खुद चलकर मिली, राह चुनी जब नेक।।
नारी शक्ति का रूप यह, देती यही संदेश।
मेहनत से मुमकिन यहाँ, बदलेगा परिवेश।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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