क्रमाॅंक:- 630,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- दीपदान महात्म्य
दीपदान महात्म्य
जल पर तैरत दीप यह, मन का हरै अंधेरा।
श्रद्धा की लौ जगमगा, प्रभु जी कीजै फेरा।।
तांबे का कलश सजा, ऊपर सुंदर दीप।
फूलों की माला सजी, प्रभु बैठे हैं समीप।।
गुड़हल और सदाबहार, अर्पण प्रभु के द्वार।
चरण कमल में सौंप दी, जीवन की पतवार।।
दीप जलावत हाथ यह, भक्ति भाव भरपूर।
तिमिर मिटे अज्ञान का, संकट होवे दूर।।
पत्ते के दोने सजे, पावन दीप प्रकाश।
भक्त हृदय में जग रहा, मुक्ति का विश्वास।।
नदियों के तट पर खड़ा, दीपदान का मोद।
शीतल पावन हो रही, गंगा जी की गोद।।
फूलों संग दीपक जले, महक रहा संसार।
प्रभु चरणों में वंदना, कीजै बारम्बार।।
भीतर का दीपक जले, तो सुधरे सब काज।
बाहर तो बस दीप है, अंतर प्रभु का राज।।
श्रद्धा का घृत डाल कर, बाती लगा सुजान।
सच्चे मन से जो करे, उसका हो कल्याण।।
लौ दीपक की कह रही, तज दे सब अभिमान।
मिट कर भी जग को दिए, पावन शुभ संज्ञान।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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