क्रमाॅंक:- 631,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- कृषक की पुकार
कृषक की पुकार
सूखा सावन देखकर, व्याकुल हुआ किसान।
अंबर की ओर देखके, माँगे जीवन-दान।।
फटी कँपेली भूमि सब, तरस रहे हैं खेत।
हाथ जोड़ विनती करे, कृषक झुकाए हेत।।
बादल घिरे हैं व्योम में, छाई काली रात।
बरसा दो माँ चेतना, सुधरे सब हालात।।
अँखियन में आशा लिए, बूढ़ा खड़ा उदास।
इक लोटा जल हाथ में, बुझाओ सबकी प्यास।।
अन्नदाता संकट में है, सूखी सकल कपास।
तुम ही रक्षक जगत की, तुम पर ही विश्वास।।
गरज रहे हैं मेघ पर, बरसे नहीं जलधार।
करुणा कर दो मात अब, सुन लो यह पुकार।।
फटी बिवाइयाँ पैर में, मैला-कुचैला भेष।
कृषक खड़ा माँ के सानिध्य, हर लो सारे क्लेश।।
झोपड़पट्टी रो रही, रोता पूरा गाम।
अमृत वर्षा कर यहाँ, कर दो सिद्ध सब काम।।
शक्ति रूपिणी माँ खड़ी, अंबर के उस पार।
भक्त पुकारे दीन हो, खोलो दया-द्वार।।
हरी-भरी धरती बने, महके सकल जहान।
कृपा करो हे जगदम्बे, सुखी रहे किसान।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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