क्रमाॅंक:- 632,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- शिव-शक्ति एकात्म्य
शिव-शक्ति एकात्म्य
अर्धांगिनी स्वरूप में, राजत मात भवानि।
संग विराजे आदि शिव, महिमा अमित बखानि।।
जटा जूट सिर पर सजे, भाल चंद्र की कोर।
नीलकंठ करुणा करैं, चितवत अपनी ओर।।
सौम्य रूप गौरी सजीं, मन में शिव का ध्यान।
आदि पुरुष परमेश्वरहिं, अरप्यो सब सम्मान।।
छुअन मात्र से शिव कड़े, मिटे सकल संताप।
आदि शक्ति गौरी प्रिये, हरतीं जग के पाप।।
रुद्रमाल गल में सजे, मस्तक त्रिपुंड सोहाय।
उमा सजीं श्रृंगार से, लखि मन हरषित जाय।।
कमल खिले हैं प्रेम के, पावन सुखद सुवास।
शिव-शक्ति के मिलन से, जग में भयो प्रकाश।।
हिमगिरि राजत पीठ पर, सुंदर सुघर अनूप।
शिव-गौरी की छाँव में, निखरत दिव्य स्वरूप।।
नैन मूँद सुंदर सजी, बैठी मात उमाद।
शिव के पावन स्पर्श से, पावत परम अगाध।।
एक प्राण दो देह हैं, शिव-शक्ति का रूप।
इनके सुमिरन से मिटे, भव-बंधन का कूप।।
शिव-पार्वती की युगल, छवि मन में जो ध्याए।
सुख-संपत्ति और शांति वो, जीवन में नित पाए।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
0 Response to "क्रमाॅंक:- 632,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- शिव-शक्ति एकात्म्य"
एक टिप्पणी भेजें