क्रमाॅंक:- 637,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- वेदमाता स्तुति
वेदमाता स्तुति
ॐ भूर्भुवः स्वः कहे, महिमा अमित अपार।
प्राण प्रदाता देव जो, वंदन बारम्बार।।
तत्स वितुर्वरण्यं भजे, सविता देव महान।
तेजपुंज पावन करें, देकर अनुपम ज्ञान।।
भर्गो देवस्य धीमहि, शुद्ध करें हर प्राण।
पाप-ताप सब दूर हों, होवे दिव्य कल्याण।।
धियो यो नः प्रचोदयात्, बुद्धि करें गतिमान।
सतमार्ग पर हम चलें, तजकर सब अभिमान।।
कमलासन बैठीं प्रिया, ज्ञानमयी सुखधाम।
हंस-वाहिनी मात को, कोटि-कोटि प्रणाम।।
वेद-माता गायत्री, चारों वेद स्वरूप।
भवसागर से तारती, देकर ज्ञान अनूप।।
हाथ कमंडल पुस्तक, शोभित दिव्य अनूप।
किरणें मुख से फूटतीं, कंचन वरदा रूप।।
महामंत्र गायत्री का, जो जन करते जाप।
मिट जाते संसार के, संकट और संताप।।
बुद्धि प्रदाता मात तुम, हर लो सब अज्ञान।
हृदय-कमल में वास कर, दो भक्ति का दान।।
सृष्टि नियमनहार जो, सविता देव प्रचंड।
उनकी शक्ति स्वरूप माँ, पूजे सकल ब्रह्मांड।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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