क्रमाॅंक:- 636,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- स्नेह का पावन बंधन
। स्नेह का पावन बंधन
शीश झुका वंदन करूँ, गणपत चरण पखार।
ऋचा-परम के स्नेह का, गाऊँ मंगलाचार।।
भाई सुंदर सौम्य है, परमानंद है नाम।
ऋचा बहन की सादगी, जैसे अनुपम धाम।।
नील गगन सी शर्ट में, भाई दिखता वीर।
रखे बहन का ध्यान जो, शांत, गुणी और धीर।।
गुलाबी परिधान में, ऋचा लग रही खास।
मुख पर निर्मल मुस्कान है, मन में भरा उल्लास।।
काँधे पर भाई स्वयं, देता सदा संबल।
बहन सुरक्षित ही रहे, जीवन बने सुफल।।
हरी-भरी पृष्ठभूमि है, सुंदर सा ये छोर।
भाई-बहन का प्यार है, ज्यों चंदा और चकोर।।
माथे बिंदी सजाए, ऋचा खड़ी मुसकाय।
भाई की लंबी उम्र की, मन में अलख जगाय।।
रक्षा का बंधन अमर, सावन की बौछार।
परमानंद सदा निभाए, भाई का अधिकार।।
दुआ करे यह जग सभी, रिश्ता रहे सलामत।
भाई-बहन के प्यार की, महके सदा कयामत।।
स्नेह की पावन डोर से, बंधा रहे ये गेह।
परम-ऋचा के जीवन में, बरसे नित नव नेह।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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