क्रमाॅंक:- 635,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- राधा-कृष्ण का पावन प्रेम
राधा-कृष्ण का पावन प्रेम
श्याम वर्ण सोहे प्रभु, राधा गोरी गात।
अद्भुत जोड़ी विश्व में, लखि हिय हरषात।।
मोर मुकुट सिर पर सजे, कुण्डल कान विशाल।
गले सोहती मंजु थिर, पुष्प-पुष्प की माल।।
कान्हा के उर से लगी, राधिका शरमाई।
प्रेम-सुधा-रस बरसता, चमकीली छवि छाई।।
अंग-अंग भूषण सजे, झलके दिव्य प्रकाश।
युगल चरण मन में बसें, मिटे सकल दुख-त्रास।।
लोचन मूँदे राधिका, पाकर श्याम का साथ।
सारे जग को भूलकर, थामे प्रीतम हाथ।।
मस्तक तिलक ललाम है, मुख पर मंद मुस्कान।
राधा-माधव रूप पर, वारूँ जग अरु प्रान।।
पुष्प खिले हैं पार्श्व में, झूम रही है बेल।
परम ब्रह्म और शक्ति का, देखो पावन खेल।।
बिना कहे सब कह रही, अंखियन की यह कोर।
बंधी प्रेम की डोर में, चितवन चंचल ओर।।
भक्ति रंग में रंग गया, देख युगल का प्यार।
राधा-कृष्ण के रूप में, समाया सब संसार।।
कृपा दृष्टि पावन करें, मेटें भव का क्लेश।
राधा-माधव नाम ही, सुख का मूल संदेश।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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