क्रमाॅंक:- 645,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- मासूम बचपन
मासूम बचपन
मासूमियत से भरा, मुखड़ा अति सुकुमार।
बाल रूप को देखकर, उमड़े मन में प्यार।।
कुंचित काले केश हैं, आँखों में है नूर।
छवि निराली देखकर, दुख होते सब दूर।।
पीत वसन तन पर सजे, सुंदर और महीन।
मुस्कान अधर पर खिली, मनभावन अति दीन।।
शीतल निश्छल नयन हैं, मन में कोई न मैल।
बालपन की छाँव में, खुशियों की है गैल।।
खड़ा हुआ चुपचाप है, धीर वीर गंभीर।
भोली-भाली सूरतें, हर लेती हैं पीर।।
प्रकृति रूप है बालपन, ईश्वर का उपहार।
इसकी सुंदर ओट में, महके सब संसार।।
बिना कपट के बोल हैं, बिना स्वार्थ का नेह।
बालक के इस रूप पर, बरसे अमृत मेह।।
घर-आँगन पावन करे, बच्चे की मुस्कान।
यह गोदी का लाल है, सुख का महा वितान।।
सादा जीवन रूप यह, मन को लेता जीत।
इस सुंदर से दृश्य से, उपजे जग में प्रीत।।
सच्चा सुख संसार का, बच्चों के ही पास।
इनके कोमल हृदय में, प्रभु करते हैं वास।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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