क्रमाॅंक:- 650,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- चाँदनी रात में कमल
चाँदनी रात में कमल
नभ में चमके चाँदनी, झील हुई है लाल।
कमल खिले हैं ताल में, महक उठा है काल।।
शीतल पावन रात में, बहती मंद बयार।
कमल खिले हैं झील में, जैसे सुंदर हार।।
नील गगन में हँस रहा, चंदा पूर्ण प्रवीन।
कमल खिले हैं ताल में, ज्यों जल भीतर मीन।।
स्वर्ण रश्मि सी झील पर, चमके चंदा आज।
दल पर सोए हैं कमल, पाकर सुंदर ताज।।
शांत झील का नीर यह, पीता सुधा अपार।
चाँदनी रात में खिल उठा, अनुपम यह संसार।।
रवि सोए रजनी खिली, जागी सुंदर रात।
खिलते पावन कमल सब, करते मन की बात।।
हरी पत्र इस झील में,बहती नीरव आप।
चंदा मामा देख कर, भूल गए सब ताप।।
पीली आभा झील पर, बिखरी सुंदर रूप।
कमल पंखुड़ी खिल उठी, पाकर चंदा धूप।।
दूर पहाड़ी दिख रही, नीले नभ के पास।
झील सुनहरी हो गई, पाकर नया प्रकाश।।
अद्भुत दृश्य तालाब का, मन को लेता मोह।
मिट जाता है देखते, जीवन का सब सोह।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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