क्रमाॅंक:- 652,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- पंडवानी सम्राज्ञी: डॉ. तीजन बाई
पंडवानी सम्राज्ञी: डॉ. तीजन बाई
पंडवानी की शान जो, तीजन बाई नाम।
विश्व पटल पर दे गई, अनुपम गौरव-धाम।।
हाथ तंबूरा तान कर, गाती वीर-कथान।
महाभारत के पात्र सब, कर देती जीवंतमान।।
छत्तीसगढ़ की लोक-कला, महकी जिनके संग।
वाणी में रस वीर का, अद्भुत चढ़ता रंग।।
कपि-सेना का युद्ध हो, या हो भीम-हुंकार।
तीजन की हर तान में, गूंजे तेज अपार।।
पद्मश्री, विभूषण मिले, मिला देश का मान।
माटी की सौगात बन, चमका उनका ज्ञान।।
सरल सहज व्यक्तित्व था, कला अनूठी धार।
अद्भुत शैली लोक की, जीती सब संसार।।
चली गईं जग छोड़ कर, कला हुई बेहाल।
गूंजेगी अब भी यहाँ, उनकी सुंदर ताल।।
शोक-मग्न है लोक-कला, रोता आज स्वदेश।
तीजन बाई छोड़ कर, चलीं दूसरा देश।।
श्रद्धांजलि सहृदय अर्पित, नमन करूँ कर जोड़।
अमर रहेगी लोक-धरा, यादें गईं निचोड़।।
ईश्वर देवें शान्ति अब, दिव्य आत्मा को मोक्ष।
अमर रहेंगी याद में, तीजन सदा परोक्ष।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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