क्रमाॅंक:- 666,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- शिव-शक्ति दिव्य अनुराग
शिव-शक्ति दिव्य अनुराग
अर्धांगिनी बनीं सदा, शिव की आदि-शक्ति।
पार्वती के रूप में, प्रकटी पावन भक्ति।।
शीश चंद्रमा सोहता, कंठ बिराजे व्याल।
गौरी संग बैठे प्रभु, सुंदर रूप विशाल।।
त्रिशूल धारी देव वर, डमरू बाजे हाथ।
पार्वती के संग में, शोभित जग के नाथ।।
सौम्य रूप शिव का दिखे, ममतामयी मात।
अमृत रस बरसे यहाँ, पावन प्रभात रात।।
प्रेम अनूठा यह दिखे, श्रद्धा और विश्वास।
शिव-गौरी के रूप में, फैला दिव्य प्रकाश।।
जटा जूट में गंग माँ, लहरें लेतीं मौज।
पार्वती की ओट में, शांत भई सब फ़ौज।।
रुद्राक्षन की मालिका, सोहे प्रभु के कंठ।
गौरी माँ के साथ से, मिटे सकल पाखंड।।
भोले का भोलापन है, मैया का श्रृंगार।
दोनों की छवि देख कर, उपजे मन में प्यार।।
कल्याणकारी शिव प्रभु, मंगलमयी माँ रूप।
सृष्टि का आधार यह, अनुपम और अनूप।।
चरण कमल में आपके, शीश झुकाए दास।
भक्ति मिले शिव-शक्ति की, यही मन में आस।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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