क्रमाॅंक:- 677,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- आकाश से ऊँचा हो तेरा नाम
आकाश से ऊँचा हो तेरा नाम
आकाशों से भी उच्च हो, ऋचा बहन का नाम।
सदा बढ़ातीं देश का, गौरव और मुकाम।।
मन में करुणा भाव भर, करतीं जन का काज।
ऋचा बहन के कर्म पर, गर्व करे यह समाज।।
सत्य, शील और सादगी, जीवन का आधार।
ऋचा बहन का नाम ही, पावनता की धार।।
शिखर छुए आकाश का, कीर्ति फैले चहुँ ओर।
ऋचा बहन बढ़ती रहें, नई सुबह की ओर।।
ज्ञान-दीप ऐसा जला, मिटा जगत का अंध।
ऋचा बहन की राह में, महके सुख का गंध।।
जग में आदर पा रही, निर्मल जिनकी प्रीत।
ऋचा बहन गातीं सदा, मानवता के गीत।।
संकल्पों में शक्ति है, सेवा मन का धर्म।
ऋचा बहन जग में करें, सदा श्रेष्ठ ही कर्म।।
तारों जैसी चमकती, ऋचा बहन की कीर्ति।
हृदय सदा पावन रहे, जैसी सुंदर मूर्ति।।
ऊँचा नाम रहे सदा, जैसे अंबर छोर।
ऋचा बहन का यश बढ़े, मंगल चारों ओर।।
शीश झुका वंदन करे, सारा ही संसार।
ऋचा बहन तुमको मिले, खुशियों का उपहार।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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