क्रमाॅंक:- 684,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नाग पंचमी और शिव महिमा
नाग पंचमी और शिव महिमा
शीश नवा महिमा कहूँ, गाऊँ शिव के गीत।
नाग पंचमी पर्व पर, उपजे मन में प्रीत।।
शोभित शिव के कंठ में, भुजंगम का हार।
कृपा करें जगपालक प्रभु, हर लें सब संसार।।
शीश उठा नागेश्वर खड़े, भोले के दरबार।
शीतल चंदन चढ़त है, पूजा बारम्बार।।
दूध चढ़ा पूजन करें, मन में रख विश्वास।
दूर करें संकट सभी, शिव भोले अविनाश।।
लिंग रूप में शिव बसे, अद्भुत रूप अनूप।
फन फैलाए नाग जी, बैठे छाँव सरूप।।
पीत पुष्प अर्पित किए, श्रद्धा भाव समेट।
नाग देव के चरण में, लाए सुंदर भेंट।।
धूप दीप पावन जले, गूंजे हर-हर नाम।
नाग पंचमी को नमन, पावन सुख का धाम।।
विषधर को आभूषण किया, भोलेनाथ कृपाल।
काल चक्र भी थामते, महाकाल विकराल।।
भक्ति भाव रस में डूबा, सारा यह संसार।
भोले बाबा दे रहे, सुख का अनुपम सार।।
हाथ जोड़ विनती करूँ, सुनियो भोलेनाथ।
नाग देव रक्षा करें, सदा रहे सिर हाथ।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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