क्रमाॅंक:- 683,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नाग पंचमी मंगल गान
नाग पंचमी मंगल गान
नाग देव का ध्यान धर, पूजें सब नर-नार।
दूध चढ़ाकर प्रेम से, हरें संकट सार।।
शीश नवाएँ भक्ति से, जोड़ रहे सब हाथ।
कृपा दृष्टि हम पर रहे, हे नागों के नाथ।।
कलश सजाकर दीप का, करते सब सत्कार।
नाग पंचमी पर्व यह, लाया सुख अपार।।
चंदन अक्षत फूल से, पूजन करते आज।
रखना प्रभुवर लाज तुम, सिद्ध करो सब काज।।
सजी आरती थाल में, महके धूप-सुगंध।
नाग देवता की कृपा, काटे सब भव-बंध।।
श्रद्धा मन में धारकर, बैठीं सब सुकुमार।
सुख-समृद्धि घर में रहे, मिटे कलय की रार।।
दुग्ध धार अर्पण करें, हरष रहा संसार।
शीश छत्र सम तानकर, बैठे नाग उदार।।
मंदिर प्रांगण में जुड़ा, भक्तों का यह मेल।
कृपा तुम्हारी जो मिले, मिटे कष्ट का खेल।।
कुमकुम रोली मोदक, अर्पित करते भक्त।
तपसी योगेश्वर यहाँ, ध्यान रूप में सक्त।।
शुभ नागपंचमी पर्व पर, गाएँ मंगल गान।
सदा सर्वदा दीजिए, ज्ञान-भक्ति का दान।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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