क्रमाॅंक:- 691,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना-श्रीराम का शांति-संदेश
श्रीराम का शांति-संदेश
जाय कहो दसकंठ से, तजहु आज अभिमान।
राघव के ही चरण में, मिलता है कल्यान।।
संधि वचन स्वीकार कर, छोड़ो हठ की राह।
वरना महाविनाश की, सुलग उठेगी चाह।।
सिय को सादर सौंपकर, मांगो प्रभु से माफ़।
वरना रण की आग में, लंका होगी साफ़।।
हे युवराज सुजान तुम, बुद्धि-बल के धाम।
सभा बीच निर्भय कहो, पावन संदेश राम।।
जाय कहो लंकेश से, समझो हित की बात।
काल शीश पर आ गया, होने को है पात।।
राम विमुख सुख ना मिले, कोटि करो उपाय।
चरण गहो रघुनाथ के, बिगड़ी बात बनाय।।
न्याय मार्ग को त्याग कर, जो करता अभिमान।
उसका वैभव नष्ट हो, सत्य कहे भगवान।।
कहे राम संदेश यह, युद्ध टले हर हाल।
सत्य वचन जो ना सुने, पड़े काल के गाल।।
राम कृपा मन में रहे, पूर्ण होंय सब काम।
शांति दूत बन तुम चले, जीतोगे संग्राम।।
क्षमा वीर का भूषण है, बोले राघव राय।
एक अवसर शत्रु को, देना नीति कहाय।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
0 Response to "क्रमाॅंक:- 691,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना-श्रीराम का शांति-संदेश"
एक टिप्पणी भेजें