क्रमाॅंक:- 704,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- माँ दुर्गा स्तुति
माँ दुर्गा स्तुति
सिंहवाहिनी मात तुम, हरती सब संताप।
भक्तजनों के काटती, पल में सारे पाप।।
अष्टभुजा शोभित सदा, लिए हाथ में चाप।
दुष्टदलन माता करो, मिटे जगत का ताप।।
मस्तक सोहे चंद्रमा, रूप परम सुकुमार।
भक्तजनों के वास्ते, खुला मुक्ति का द्वार।।
घंटनाद से गूँजता, सारा यह आकाश।
भयभीत हों सब दुष्टजन, मन में हो प्रकाश।।
गदा, त्रिशूल सुशोभित, खड्ग चक्र हैं हाथ।
शरणागत की रक्षिका, नमो नमो जगमात।।
लाल चुनर सोहे महा, रूप दिव्य अभिराम।
चरण-कमल में माँ तुम्हारे, शत-शत करूँ प्रणाम।।
बाघ सवारी मात की, महिमा अपरम्पार।
दुःख-दरिद्र सब दूर हों, महके यह संसार।।
ज्ञान-भक्ति का दान दो, हे जग की आधार।
भटक रहा संसार में, नैया कर दो पार।।
किरणें बिखरें तेज की, जैसे उदित विहान।
शत्रुदमन तुम कीजिए, देकर सुख का दान।।
सच्चे सुख का रूप तुम, आदिशक्ति कल्याण।
हृदय बसो माता सदा, गाऊँ तुम्हरे गान।।
परमानंद निषाद ‘प्रिय’
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