क्रमाॅंक:- 705,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- संकटमोचन हनुमान
संकटमोचन हनुमान
(दोहा छंद)
संजीवनी लेने चले, परम भक्त हनुमान।
राम-काज में तत्पर हुए, पवन-पुत्र बलवान।।
लक्ष्मण मूर्छित भूमि पर, व्याकुल हुए रघुवीर।
वेग बढ़ाकर उड़ चले, संकट हरने वीर।।
कालनेमि माया रची, पथ में रचकर जाल।
रघुवर दूत पल भर में, बना उसका काल।।
महिमामय कपिराज को, रोक सका नहिं कोय।
जिसके मन में संशय था, पल में दूर वह होय।।
द्रोणागिरि पर पहुँचकर, बूटी सूझी नाहिं।
पूरा पर्वत उठा लिया, अपने कर में ताहिं।।
भरत बाण मारा तभी, समझे कोई चोर।
राम-नाम मुख से सुना, आए उनके ओर।।
सत्य जान गदगद हुए, भरत हुए बलिहान।
विदा किया कपिराज को, कहकर जय हनुमान।।
नभ-पथ से उड़ चले, पर्वत लिए विशाल।
लक्ष्मण के प्राण बचा, हर लिया संकट-जाल।।
भक्ति अनोखी देखकर, देव करें जयकार।
‘संकटमोचन’ नाम है, महिमा अपरम्पार।।
‘परमानंद’ यह मानकर, शरण गहो हनुमान।
चरण-शरण हनुमान की, पूर्ण करें सब काम।।
✍️ परमानंद निषाद ‘प्रिय’
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