क्रमाॅंक:- 706,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- मेरी बेटी, मेरा अभिमान
मेरी बेटी, मेरा अभिमान
(दोहा छंद)
बेटी है गौरव सदा, रखे जगत में मान।
इसके ही दम से बढ़े, जग में मेरा शान।।
घर की रौनक है यही, आँगन की मुस्कान।
इसके मुख को देखकर, भूलूँ रोज थकान।।
सीखे अक्षर प्रेम के, पकड़े हाथ किताब।
पढ़े-लिखे आगे बढ़े, पूर्ण करे हर ख़्वाब।।
पापा का साया रहे, बेटी के ही पास।
मन में इसके ही लिए, जागा एक विश्वास।।
सूरज जैसा तेज हो, चमके इसका नाम।
शीश झुकाकर मैं करूँ, प्रभु को रोज प्रणाम।।
लाडो मेरी है बड़ी, चंचल और सुजान।
इसकी सुंदर सीख से, महके रोज जहान।।
बचपन इसका खिल रहा, जैसे सुंदर फूल।
इसको खुशियाँ मैं सकूँ, जाऊँ दुख को भूल।।
कंधे पर मेरे सदा, रखती अपना हाथ।
जीवन के हर मोड़ पर, निभा रही है साथ।।
मेरी बेटी से मिली, जीवन को इक राह।
सच्ची दौलत है यही, पाऊँ और न चाह।।
परमानन्द विशेष है, बेटी का यह रूप।
घर में बिखरी है यहाँ, पावन प्यारी धूप।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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