क्रमाॅंक:- 709,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- शांति की उड़ान
शांति की उड़ान
नीला अम्बर हंस रहा, उड़ते पावन वीर।
मन में भरता हौंसला, मिटती सारी पीर।।
चमक रहा है सूर्य यह, फैलाता आलोक।
सुख का मौसम आ गया, भूल गए सब शोक।।
उड़ते सुंदर पंख ये, छूते ऊँचा व्योम।
शांति अनूठी छा गई, महक रहा है रोम।।
हरी भरी यह भूमि है, दिखती पावन आज।
झूमे उपवन प्रेम से, सुंदर सजते काज।।
श्वेत कबूतर उड़ चले, तजकर सारा बैर।
मन में मंगल भावना, माँगे सबकी खैर।।
शीतल पावन वायु है, बहती सुंदर मंद।
जीवन में रस घुल गया, जागा परमानंद।।
सूरज की किरणें यहाँ, देतीं पावन ज्ञान।
अंधकार सब मिट गया, जागा नया विहान।।
नभ में उड़ते पंख ये, कहते मन की बात।
सुखमय जीवन हो गया, बीती दुःख की रात।।
धरती अम्बर मिल रहे, रचते अनुपम दृश्य।
सुंदरता को देखकर, मुग्ध हुआ है शिष्य।।
शांति दूत ये उड़ रहे, देते पावन मोद।
बैठा मानव हर्ष से, प्रकृति माँ की गोद।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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