क्रमाॅंक:- 712,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- माँ ब्रह्मचारिणी स्तुति
माँ ब्रह्मचारिणी स्तुति
(दोहा छंद)
श्वेत वसन तन पर सजे, हाथ लिए जप माल।
मातु भारती कष्ट सब, हरतीं हर इक काल।।
सौम्य रूप माँ का दिखे, मन में भरता मोद।
भक्त जनों को मिल रही, पावन सुख की गोद।।
कमंडल सोहे हाथ में, ज्ञान सुधा का सार।
तप का मारग दे रहा, जीवन को उपकार।।
शीश मुकुट सुंदर लसे, आभा अमित महान।
भक्ति भाव उर में जगे, गाएँ हम सब गान।।
त्याग तपस्या की मूरत, शक्ति रूप कल्याण।
शरण पड़े जो भक्त हैं, उनका हो उत्थान।।
क्रोध लोभ सब दूर हो, मिले ज्ञान का दान।
मातु दया अब कीजिए, रखियो जन का मान।।
ध्यान धरे जो प्रेम से, कटते संकट घोर।
मन मंदिर में हो उजाला, मिटता तम का भोर।।
भव बाधा सब दूर हो, पूजें चरण सरोज।
सच्चे मन से जो भजे, पाए पावन ओज।।
नवरात्रों की बेला में, गूँजे जय-जयकार।
मातु भवानी आ चुकी, करने भव से पार।।
परमानंद ही मिल रहा, सुमिरन करते नाम।
मातु चरण में झुक रहा, यह सारा संसार।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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