क्रमाॅंक:- 713,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- माँ चंद्रघंटा स्तुति
माँ चंद्रघंटा स्तुति
(दोहा छंद)
सिंह पीठ पर बैठ कर, आई आदि भवानि।
दुष्ट जनों का नाश कर, रखे जगत निगरानि।।
शीश सोहता चंद्रमा, घंटा रूप अनूप।
भक्त जनों को सुख मिले, देख मात का रूप।।
हाथ त्रिशूल अरु खड्ग है, बाण धनुष भी सोह।
तेज रूप यह मात का, सबका मनवा मोह।।
सिंह-गर्जना से डरें, दानव कपटी पाप।
ध्यान धरे जो मातु का, पावन होय प्रताप।।
तीजा दिन नवरात्र का, पूजें पावन रूप।
करो आरती प्रेम से, महके चंदन धूप।।
अभय दान माँ दे रही, संकट हरती मात।
कृपा-दृष्टि जब हो रही, सुख बरसे दिन-रात।।
स्वर्ण कांति सी चमकती, मस्तक दिव्य ललाट।
महिमा गावे देव सब, महिमा बड़ी विराट।।
घंटे की उस ध्वनि से, भागे डर अरु पाप।
शरण तुम्हारी जो रहे, मिटते उसके ताप।।
शांति सुख की खान है, माँ चंद्रघंटा नाम।
परमानंद तो कर रहा, चरणों में शत प्रणाम।।
भक्ति रस में डूब कर, गाए मन यह गान।
मुक्ति मार्ग दिखलाइए, देकर सच्चा ज्ञान।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
0 Response to "क्रमाॅंक:- 713,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- माँ चंद्रघंटा स्तुति"
एक टिप्पणी भेजें