क्रमाॅंक:- 714,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- माँ कुष्मांडा वंदना
माँ कुष्मांडा वंदना
(दोहा छंद)
सिंह वाहिनी मात तव, महिमा अमित अपार।
भक्त जनों के कष्ट को, हरतीं बारम्बार।।
मंद हँसी से आपने, रचा सकल ब्रह्मांड।
तेज पुंज साकार माँ, जय जय माँ कुष्मांड।।
अष्ट भुजाधारी नमन, शक्ति रूपा कल्याणि।
बाण कमंडल सोहता,अमरित कलश प्रपाणि।।
सूर्य लोक में वास तव, कांति अमित अविकार।
तिमिर हरण माँ कर जगत, भरें रोज उजियार।।
ऋद्धि सिद्धि दात्री तुम्हीं, सुख संबल की खान।
शरण पड़े जो भक्त हैं, करते सब कल्यान।।
कमल पुष्प हाथे सजे, चक्र गदा वरदान।
भय बाधा सब दूर हो, ध्यावे जो नित ध्यान।।
पावन दिवस चतुर्थ पर,पूजे यह संसार।
भवसागर से तारती, मिले भक्ति उपहार।।
हृदय कमल में वास कर, बुद्धि ज्ञान दे मात।
दुष्ट दलन दुख भंजनिका, मंगलमय परभात।।
परमानंद प्रसाद दे, काटो सकल कलेश।
चरण शरण में रख सदा, हरहु मात अंदेश।।
माँ कुष्माण्डा दयामई, संकट हरनी आइ।
हाथ जोड़ विनती करूँ, कृपा करहु सुखदाइ।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
0 Response to "क्रमाॅंक:- 714,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- माँ कुष्मांडा वंदना"
एक टिप्पणी भेजें