क्रमाॅंक:- 724,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- श्रीराम दरबार
श्रीराम दरबार
(दोहा छंद)
सौम्य रूप राघव सजे, हाथ धनुष वर राज।
शीश मुकुट पावन सजे, सिद्ध करें सब काज।।1।।
वाम भाग सीता खड़ी, रूप शील की खान।
सौम्य वदन पावन सती, जग करती कल्यान।।2।।
सेवा में लक्ष्मण खड़े, धनुष बाण ले हाथ।
भक्ति भाव मन में सदा, सोह रहे प्रभु साथ।।3।।
चरण कमल हनुमान जी, बैठे हैं चित लाय।
हाथ जोड़ विनती करें, भक्ति अनन्य सुभाय।।4।।
दिव्य रूप दरबार यह, मंगल भवन महान।
देखें छवि पावन लगे, मिटता सब अज्ञान।।5।।
हाथ गदा धारे खड़े, वीर धीर हनुमान।
अस्त्र शस्त्र रक्षक बने, महिमा अमित महान।।6।।
पीताम्बर तन पर सजे, गल में हार विशाल।
रत्न जड़ित कुंडल सजे, चंदन टीका भाल।।7।।
मातु सती आशीष दे, सुखद रूप अभिराम।
भक्त जनों के कष्ट को, हरते प्रभु श्री राम।।8।।
त्याग शील लक्षण सजे, लखन लाल अनुहार।
सेवा में तन्मय खड़े, भ्रातृ प्रेम आगार।।9।।
राम नाम सुमिरन करो, संकट मिटे तमाम।
शरण पड़े हनुमान जो, पाते सुख विश्राम।।10।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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