क्रमाॅंक:- 723,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- इंकलाब के अजेय नायक: आजाद
इंकलाब के अजेय नायक: आजाद
(दोहा छंद)
वीर अमर आजाद थे, भारत के अनमोल।
ज्योति जगाई क्रांति की, बोले निर्भय बोल।।1।।
मातृभूमि की लाज को, जिसने रखा सँभाल।
गोली खाकर भी कभी, दिया न झुकने भाल।।2।।
मूँछों पर जब ताव दें,रण में थे बलवान।
दुश्मन थर-थर काँपते, देख वीर की शान।।3।।
उस पावन संग्राम का, गाएँ मिलकर गान।
जिससे चमका विश्व में, भारत का सम्मान।।4।।
हाथों में पिस्तौल थी, जगा देश-अभिमान।
हँसते-हँसते दे दिए, भारत हित में जान।।5।।
हिला दिया था वीर ने, अंग्रेजों का राज।
सिंह-गर्जना से भगा, अत्याचार समाज।।6।।
काँध जनेऊ सोहता, मस्तक पर था तेज।
भारत माँ की गोद में, सोया वीर सुरेज।।7।।
अंतिम क्षण तक जो लड़े, बढ़ा वीर सम्मान।
जीवित वैरी भी कहें, ऐसा था बलिदान।।8।।
भगत सिंह के साथ थे, क्रांति-मार्ग के वीर।
आजादी की राह में, रहे सदा गंभीर।।9।।
त्याग-समर्पण की कथा, लिख दी अपनी जान।
देशभक्ति में कर गए, जीवन का बलिदान।।10।।
काकोरी के साथ में,बढ़ता क्रांति-प्रचार।
संकट में छोड़ा नहीं,साहस और विचार।।11।।
क्रांति-दल के वीर बने, नायक वीर महान।
उनके चरणों में सदा, शत-शत हो गुणगान।।12।।
बाल्यकाल से ही जगी, चित्त में देश-भक्ति।
कोड़े खाए पर रही, अडिग वीर की शक्ति।।13।।
स्वयं नाम 'आजाद' रख, भरे न्याय की भींच।
*आजादी के बाग को, दिया लहू से सींच।।14।।
भारत माता धन्य है, पाकर ऐसा लाल।
अमर ज्योति बन आज भी, रोशन भारत-भाल।।15।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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