क्रमाॅंक:- 725,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- गरीब बेटी के अमीर ससुराल

क्रमाॅंक:- 725,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- गरीब बेटी के अमीर ससुराल

             गरीब बेटी के अमीर ससुराल
                           (दोहा छंद)

छोड़ चली वह लाडली, बाबुल का घर-बार। 
पहुँच गई ससुराल में, पाकर सुंदर प्यार।।1।।

याद सताए मात की, रोए बारंबार।
याद दिलाए झोपड़ी, महलों का यह द्वार।।2।।

महल खड़ा है सामने, चमके कंचन-हार।
दासी घूमे पास में, वैभव का विस्तार।।3।।

देती सास दुलार अति,करें सदा मनुहार।
पति ने दी खुशियाँ सभी, महका है संसार।।4।।

धनी हुए सब जन यहाँ, बदला जग का रूप।
मन संकोच मिटा नहीं,रहा हृदय में कूप।।5।।

मात-पिता की दीनता, सुधि आए सुकुमार।
मन रोए उस याद में, भूल सकल शृंगार।।6।।

लिखा विधाता ने यही, सुंदर सा संयोग।
पलक झपकते मिट गया, जीवन का सब सोग।।7।।

लाल चुनरिया तन सजी, माथ बिंदिया लाल।
दुल्हन बन वह आ गई, चाल चले सुमराल।।8।।

एक ओर है झोपड़ी, दूजी ओर मकान।
पल में भाग्य बदल गया, विधि का यही विधान।।9।।

बना रहे यह लाड अब, गूँजे मंगल-गान।
सुखी रहे यह लाडली, बढ़े जगत में मान।।

                         परमानंद निषाद 'प्रिय'

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