क्रमाॅंक:- 136, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- दो नैना
दो नैना
दो नैना जब से तुम्हारे देखा,
खोया रहता हूॅं तुम्हारे नैनों में।
बरसा दो मझपे अपना प्यार,
प्यार नजर आता तेरे नैनों में।१।
तेरे प्यार का रंग मुझपे चढ़ा,
जब नैनों से मैंने प्यार पड़ा।
तेरा प्यार बेचैन करने लगा,
प्यार का इजहार करना पड़ा।२।
जब भी तुझको देखता हूॅं,
दिल धड़कने लगता है।
जब से मुझको प्यार हुआ,
दिल मचलने लगता है।३।
दिखा जलवे तेरे दो नैन में,
तेरे-मेरे प्यार का तस्वीर।
आज बरसा दो तुम मुझ पर,
दो नैनों का अपना प्यार।४।
जब से प्यार मुझको हुआ,
चेहरे पर हॅंसी छाई है।
जिंदगी खुशनुमा बन गया,
प्यार जीवन में आई है।५।
परमानंद निषाद"प्रिय"
साहित्य साधना सभा,छत्तीसगढ़
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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