क्रमाॅंक:- 158, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- क्या-क्या समझ बैठे !
क्या-क्या समझ बैठे !
हमने कुछ जानकारी चाही,
वो इसे प्रिय की जिद समझ बैठे।
हमने तो याद करने का तरीका बदला,
वो इसे अहित समझ बैठे।
हमने तो उन्हें हराने के फायदे बताये,
वो इसे अपनी जीत समझ बैठे,
हमने तो उनको अपना दोस्त समझा,
वो इसे ना मीत समझ बैठे,
हमने तो कुछ चंद लाईन लिखे,
वो इसे राधिका का गीत समझ बैठे ।।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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