क्रमाॅंक:- 271, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- किस्मत की लकीर
मेरे हाथों के लकीरों में क्या लिखा होगा।
रब मेरे किस्मत में कुछ भला लिखा होगा।।
जमाना रुठ जाये कोई फर्क नहीं पड़ता।
अपने ही रुठे है तो,जमाना क्या करता।।
इस मतलबी दुनिया में सभी रूलाने वाले है।
लेकिन सनम दुनिया में नहीं हँसाने वाले हैं।।
एक बार मुझे अपना बनाकर तो देख।
गम में छुपे सुख को हँसी में तो शेख।।
मंदिर में विराजमान भगवान से तो कहो।
कुछ तो अपने तकदीर में लिखा होगा।।
मन से मिटा तो सारे ईर्ष्या और द्वेष भाव।
मन में प्रेम भाव रखो नहीं होगा बुरा अभाव।।
माँ के चरणों में बसा है स्वर्ग का जन्नत।
सदा माता से प्रेम करो करना नहीं पड़ेगा मन्नत।।
जब तक जिंदा रहेंगे प्रेम भाव से जीना होगा।
प्यार दूलार से गले लगाकर जीना होगा।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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