क्रमाॅंक:- 292, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- महत्वपूर्ण है तुलसी का स्थान
आज भी मेरे आँगन में,
तुलसी का स्थान है।
आज भी गाँव के गलियों में,
वहीं पुराना मकान है।।
ना ही शोर,ना ही भगदड़,
होती है मेरे गाँव में।
कोमल की मीठी आवाज से,
होती है सुबह मेरे गाँव में।।
रोज घर के आँगन में बैठकर,
तुलसी से बातें करता हूँ।
तुलसी के छाँव में बैठकर,
मैं गुनगुनाता रहता हूँ।।
सरसों के फूल को देखकर,
मन आनंदित हो उठता।
घर के आँगन तुलसी से,
बातें करते शाम ढलता।।
निठोरा जंगल को छोड़कर,
अब तुम घर आ जाओ।
मेरे गाँव में सब कुछ है,
मीठे स्वर में तुम गाओ।।
मेरे आँगन की तुलसी,
अब तो रूठ रही हैं।
छाँव में बैठकर 'स्वीटी',
बातें सुन हँस रही है।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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