क्रमाॅंक:- 575, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंदमुक्त रचना- नव शक्ति महिमा
नव शक्ति महिमा
प्रथम रूप शैलपुत्री, शिव-शक्ति आधार।
हिमाद्रि की सुता तुम, तरो सकल संसार।।
द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी, तप का पावन पुंज।
ज्ञानमयी विद्या प्रदा, खिले हृदय-पथ कुंज।।
तृतीय रूप चंद्रघंटा, दिव्य सौम्य स्वरूप।
सिंह-वाहिनी माँ सजे, अनुपम तेज अनूप।।
चतुर्थ रूप कूष्मांडा, आदिशक्ति अवतार।
अण्ड-ब्रह्म जननी तुम्ही, बिनु तुम घोर अंधार।।
पंचम स्कंदमाता शुभा, कार्तिकेय की मात।
वात्सल्य की मूर्ति माँ, जग महिमा विख्यात।।
षष्ठ रूप कात्यायनी, महिषासुर संहार।
ऋषि कात्यायन की सुता, दे भक्ति उपहार।।
सप्तम कालरात्रि माँ, शुभ फलदायी नाम।
काल-विनाशिनी अम्बिका, सिद्ध करो सब काम।।
अष्टम रूप महागौरी, श्वेत वसन परिधान।
करुणा की वर्षा करो, अभय करो वरदान।।
नवम सिद्धिदात्री जपो, अष्ट सिद्धि की खान।
पूर्ण मनोरथ कीजिये, माँ दो भक्ति दान।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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