क्रमाॅंक:- 588, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- भक्ति और आस्था: एक दर्शन
भक्ति और आस्था: एक दर्शन
माता तेरे रूप में, श्रद्धा की ज्योत जगाई।
भक्तों के इस प्रेम को, तूने ही राह दिखाई।।1।।
सिंह वाहिनी शक्ति स्वरूपा, मनवांछित फल दानी।
चरणों में तेरे झुकता शीश, तू सबकी जग कल्याणी।।2।।
आठ भुजाएं शोभित तेरी, महिमा तेरी अपार।
दुष्टों का संहार करे, भक्तों का उद्धार।।3।।
हाथ में तलवार सजे, निर्भय होकर खड़ी।
तेरे दर्शन मात्र से, टलती हर घड़ी।।4।।
लाल साड़ी और कंगन, मन को मोह लेते हैं।
तेरी मूरत को निहार कर, भक्त निहाल होते हैं।।5।।
सिंह की गर्जना से गूँज उठे, पूरा संसार।
शक्ति की प्रतीक तू, प्रेम का अपार भंडार।।6।।
तेरे चरणों में है स्वर्ग, तेरी शरण में है शांति।
तेरी भक्ति से मिटती है, हर दुविधा और भ्रान्ति।।7।।
तू ही दुर्गा तू ही काली, तू ही सबकी जननी।
तेरे आशीर्वाद से ही, सफल होती सबकी करनी।।8।।
भक्तों के संकट हरने को, तू हरदम तैयार।
तेरी महिमा गाते गाते, पार उतर जाए संसार।।9।।
तेरे इस दिव्य रूप को, नमन करे पूरा जग।
तेरी कृपा से ही चलता है, हर एक जीवन का डग।।10।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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