क्रमाॅंक:- 601, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- माँ: एक पूर्ण ब्रह्मांड

क्रमाॅंक:- 601, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- माँ: एक पूर्ण ब्रह्मांड

                  माँ: एक पूर्ण ब्रह्मांड

माँ केवल इक शब्द नहीं, माँ पूरा ब्रह्मांड।
अगम अथाह रहस्य है, समझ न पाए पांड।।

त्याग दया की मूरती, ममता का मधु-कोश।
अमृत दे परिवार को, पी जाए सब दोष।।

संयम सागर माँ हृदय, सहे कष्ट हर बार।
बिन माँगे ही दे सदा, ईश्वर सा उपकार।।

आशीषों का कोष है, ममता की है खान।
अपेक्षा के बाद भी, देती सबको दान।।

रिश्ता ही केवल नहीं, संस्था पूर्ण महान।
मिले पूर्णता नारी को, पाकर माँ का मान।।

अंतर्जगत का विकास है, माँ की करुणा सार।
माँ की ममता पर खड़ा, सारा ही सदाचार।।

टेरेसा,कौशल्या बनीं, मातृत्व की मूरत।
जीजाबाई,यशोदा ने, बदली जग की सूरत।।

सुंदर संतति भाग्य है, विधाता का है खेल।
माँ गढ़ती व्यक्तित्व को, ममता का कर मेल।।

ईश्वर की प्रतिछाया है, माँ का रूप अनूप।
बेटी पहला चरण है, मातृत्व का ही रूप।।

सेवा घर की प्यार से, करती सदा सयानी।
बेटी बन निज धर्म को, निभा रही मखानी।।

पीले कर निज हाथ जब, पहुँची दूजे द्वार।
बहु-पत्नी बन जीतती, सबका ही परिवार।।

जननी बन ममता लुटा, गढ़ती नयी उमंग।
कुशल शासक बन सिखाती, जीवन जीने के ढंग।।

दादी-नानी रूप में, देती शुभ आशीष।
पीढ़ी का पथ रौशन करे, झुकता सबके शीश।।

लोरी-झुनझुना थाप है, सुख का अनुपम धाम।
काशी काबा माँ बसे, जैसे चारों धाम।।

प्रथम शब्द मुख माँ खिला, जीवन का आधार।
अंत समय भी मुख रहे, माँ तेरा उपकार।।

शक्ति विराजत पास है, जिसके सिर पर माँ।
छाया बनकर साथ है, हर सुख-दुख में माँ।।

धूप पसीना तप करे, माँ की अचल असीस।
पुत्र बने काबिल बड़ा, झुके गर्व से सीस।।

कलयुग की विपरीत गति, माँ देती सत्ज्ञान।
भटके पग को रोकती, ममता की पहचान।।

ईश्वर का प्रतिरूप है, शास्त्रों का यह सार।
कमी खले जब माँ नहीं, सूना है संसार।।

नमनमाँ तेरे ही साथ से, पाया है सतमार्ग।
तू ही राह दिखा गई, देकर ज्ञान-पराग।।

पास नहीं तू आज है, फिर भी साथ विधान।
चले तुम्हारे मार्ग पर, बने आज इंसान।।

                     परमानंद निषाद 'प्रिय'

0 Response to "क्रमाॅंक:- 601, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- माँ: एक पूर्ण ब्रह्मांड"

एक टिप्पणी भेजें

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article