क्रमाॅंक:- 602, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- वेदमाता माँ गायत्री स्तुति
वेदमाता माँ गायत्री स्तुति
हंस वाहिनी शुद्ध मति, कमल विराजे पाँव।
ज्ञान दीप उजियारा हो, मिटे मोह का ठाँव।।
हाथ लिए पुस्तक सकल, वेद ज्ञान का सार।
कलश धारिणी माँ कृपा, तरे भव्य संसार।।
लाल वसन सोहे तनू, कंचन मुकुट विशाल।
दिव्य आभा मुख पर खिले, कटे दुखों का जाल।।
भर्गो देवस्य धीमहि, धियो योनः परचोद।
पञ्च तत्त्व का मेल माँ, देती आत्म-प्रमोद।।
सावित्री माँ तुम सदा, ज्ञान भक्ति की धार।
भक्तों के संकट हरन, करतीं बेड़ा पार।।
कंठ विराजें मोतियां, भुजा कंगन अनमोल।
सतयुग की तुम ज्योति हो, वाणी मधुरम बोल।।
सृष्टि का आधार माँ, गायत्री शुभ नाम।
सत्य मार्ग दिखलाइए, सुमिरूँ सुबहो-शाम।।
नील गगन पीछे खड़ा, सागर लहरें संग।
माँ की मूरत अति भली, चढ़े ज्ञान का रंग।।
बुद्धि शुद्ध कर दीजिए, तजें अधर्म का साथ।
शरण तुम्हारी जो आए, रखना सिर पर हाथ।।
परम पूज्या आदि शक्ति, वेदों की तुम मात।
जीवन पथ रोशन करो, हर अंधियारी रात।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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