क्रमाॅंक:- 607, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- थमेगा कब रैगिंग का दंश?
थमेगा कब रैगिंग का दंश?
रैगिंग की यह आपदा, मिटी न अब तक यार।
रोज न जाने कितने ही, होते केस तैयार।।1।।
शिकवे अनसुने ही रहे, छिपी रही हर बात।
संस्थानों के बीच ही, सुलझाते हालात।।2।।
यूजीसी आँकड़े कहें, और कहें हेल्पलाइन।
सौ-सौ अर्जी आ रहीं, टूटी संशय-लाइन।।3।।
नए सत्र की भोर में, बढ़ता इसका त्रास।
सहमे-सहमे छात्र सब, लेते लंबी सांस।।4।।
यह केवल हुड़दंग नहिं, गहरी मानस-व्याधि।
छात्रों के मन को डसे, बनकर एक उपाधि।।5।।
तन को जख्मी यह करे, मन को दे आघात।
हँसता-खेलता छात्र भी, रोता है दिन-रात।।6।।
सख्त नियम कानून अब, लागू करे प्रशासन।
निगरानी भी तेज हो, सुधरे तब तो शासन।।7।।
केवल नियम से क्या बने, सजग रहे हर जीव।
जागरूकता से बचे, शिक्षा की यह नींव।।8।।
सामूहिक संकल्प से, होगा इसका अंत।
मिलकर सब आवाज़ दें, तब आएगा वसंत।।9।।
माता-पिता और छात्र सब, रखें पूरा ध्यान।
गलत बात को न सहें, तभी बढ़ेगा मान।।10।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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